राजनैतिक दखल के पेंच में फंसी जागेश्वर मंदिर प्रबंधक की कुर्सी, लोकभवन ने लौटाई फाइलें, नए सिरे से होंगे आवेदन

The Governor has returned all applications for the post of manager of the Jageshwar Temple Management Committee due to political interference
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Political Interference : जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति पिछले कई महीनों से भंग चल रही है। बता दें कि जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति का गठन 2013 में हाईकोर्ट के आदेश पर हुआ था। पांच सदस्यीय समिति के पदेन अध्यक्ष डीएम होते हैं। प्रबंधक और उपाध्यक्ष की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं। हाईकोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार प्रबंधक पद के आवेदक न तो किसी राजनैतिक दल के सदस्य होने चाहिए और न वह किसी राजनैतिक दल से संबंध ही होने चाहिए। प्रबंधक का कार्यकाल अक्तूबर 2024 में ही खत्म हो गया था। इससे पहले जुलाई 2024 में ही जिला प्रशासन ने प्रबंधक पद पर नियुक्ति के लिए विज्ञप्ति जारी कर दी थी। बताया जाता है कि उस दौरान जांच के बाद एक आवेदक जोकि राजनीति से जुड़ा हुआ था, उसका आवेदन अधिकारियों ने निरस्त कर दिया था। उसके बाद ऐसा दबाव पड़ा कि सारे आवेदन निरस्त करने पड़े थे। साल 2024 में ही प्रबंधक पद के लिए दोबारा विज्ञप्ति जारी कर दी गई थी। बावजूद इसके राजनेताओं ने भी आवेदन कर दिया था। सूत्रों के मुताबिक अपनी फाइल ओके करवाने के लिए दावेदार नेताओं ने अपने कई आंकाओं से जिला स्तर पर अफसरों पर दबाव डलवाया था। नतीजा ये रहा कि सरसरी जांच के बाद आवेदन जिला मुख्यालय से लोकभवन भेज दिए गए थे। चर्चा ये भी है कि जिले से भेजी गई लिस्ट में राजनेताओं के नाम भी दबाव में आकर लोकभवन भेज दिए गए थे। उसके बाद ऊपर से हुई जांच में मामला पकड़ में आ गया था। बताया जाता है कि राजनेताओं की कई शिकायतें भी लोकभवन में हुई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए लोकभवन ने सभी आवेदकों की फाइलें जिला प्रशासन को लौटा दी हैं।

राजनेताओं ने लगाया था एड़ी-चोटी का जोर

जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति में 25000 रुपये मासिक सेलरी वाली पोस्ट के लिए राजनीति से जुड़े कुछ लोगों ने भी आवेदन किया था। बताया जाता है कि ये राजनेता अपने आंकाओं के जरिए अफसरों पर लंबे समय से दबाव बना रहे थे। तमाम बड़ी-बड़ी शिफारिशें भी लगा रहे थे। महज 25 हजार रुपये मासिक सेलरी वाली पोस्ट के लिए करोड़पति दावेदार भी मैदान में थे और बड़ी-बड़ी अप्रोच लगा रहे थे। सूत्रों के मुताबिक मंदिर के प्रबंधक पद के लिए बड़ी-बड़ी शिफारिशें देख लोकभवन के अफसर भी हैरान थे।

उपाध्यक्ष पद के आवेदन में भी असमंजस

जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति में उपाध्यक्ष का पद भी पिछले साल सितंबर से खाली चल रहा है। उसके बाद जिला प्रशासन ने परंपरागत तरीके से यानी जैसा पूर्ववर्ती अफसरों ने किया था उसी का अनुशरण करते हुए विज्ञप्ति निकाली थी। विज्ञप्ति  में वो ही शर्तें रखी थी, जोकि प्रबंधक की पोस्ट के लिए थी। मसलन उपाध्यक्ष पद का आवेदक राजनैतिक दल से संबंध न हो, वह पुजारी न हो। इन शर्तों के कारण क्षेत्र के कई लोग इस पद के लिए आवेदन ही नहीं कर पाए थे। सख्त नियमों के चलते इस पद के लिए केवल तीन ही आवेदन हो पाए थे। बाद में पता चला कि हाईकोर्ट के आदेश में ऐसा कोई जिक्र नहीं है, जिसमें पुजारी या राजनैतिक कार्यकर्ता इस पद के लिए आवेदन नहीं कर सकता है। उपाध्यक्ष पद की विज्ञप्ति की अटपटी शर्तों से लोग हैरान हैं।

कम से कम दस आवेदन होना जरूरी 

मंदिर समिति का प्रबंधक बनने के लिए कम से कम दस आवेदन मिलना जरूरी है। दस से कम आवेदन मिलने पर फाइल राजभवन नहीं भेजी जा सकती है। इसके अलावा आवेदक का किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं होना चाहिए। साथ ही वह मंदिर का पुजारी ना हो। आवेदक को सामाजिक क्षेत्र में पांच साल का अनुभव होना जरूरी है और वह वह स्थानीय व्यक्ति होना चाहिए।  

एक माह के भीतर भेजी जाएगी नई लिस्ट

डीएम अंशुल सिंह के मुताबिक आवेदनों में तय गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया है। इसके चलते आवेदन की फाइल राजभवन से वापस लौटाई गई है। जिला प्रशासन की ओर से नए सिरे से आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक माह के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर फाइल राजभवन भेज दी जाएगी।

 


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