जागेश्वर में जटागंगा को सुखाने की साजिश ! सूखते गदेरे में लाखों की सिंचाई योजना बनाने की तैयारी
Almora News : जागेश्वर धाम में पवित्र जटांगगा के सहायक गदेरे में मनमाने ढंग से सिंचाई योजना बनाने की तैयारी से लोग हैरत में पड़े हुए हैं। इस गदेरे में अभी एक दो इंच पानी भी नहीं है और सिंचाई विभाग वहां पर चार इंच मोटी पाइपलाइन बिछाने की तैयारी में है। सबसे बड़ी बात ये है कि जहां पर सिंचाई योजना बनाई जा रही है उसके ठीक नीचे से पूर्व से ही जल संस्थान की पेयजल योजना संचालित हो रही है।
Almora News : जागेश्वर धाम में जनगड़ पवित्र जटागंगा का प्रमुख सहायक गदेरा है। जटागंगा के जल से ही जागेश्वर धाम में भगवान शिव का अभिषेक होता है। गर्मियों का सीजन शुरू होने से पहले ही जटागंगा और जनगड़ गदेरा सूखने के कगार पर पहुंच जाता है। जनगड़ गदेरे से जागेश्वर धाम के लिए एक पेयजल योजना संचालित हो रही है। इसी गदेरे से कुमाऊं मंडल विकास निगम के टीआरसी को भी पेयजल लाइन गई है। इधर, अब सिंचाई विभाग जनगड़ गदेरे में करीब 15 लाख रुपये की लागत से एक सिंचाई योजना तैयार करने में जुटा हुआ है। बकायदा सिंचाई योजना के लिए चार इंच मोटे पाइप भी मौके पर पहुंचाए जा रहे हैं। गुरुवार को एक वाहन ने ब्रह्मकुंड के ऊपर सड़क किनारे पाइप उतारने शुरू किए तो ही लोगों को सिंचाई विभाग की योजना की भनक लग पाई। लोगों ने कहा कि सूखते गदेरे से सिंचाई लाइन बिछाकर पेयजल योजना को प्रभावित करने और जटागंगा को सुखाने की साजिश रची जा रही है। लोगों ने सूखते गदेरे से सिंचाई योजना को सवालों के घेरे में खड़ा करते हुए इसे सरकारी धन की बंदरबांट बताया है। लोगों ने अधिकारियों से इस योजना को तत्काल बंद करने और जटागंगा के सहायक गदेरे के संरक्षण के लिए जरूरी प्रयास करने की मांग उठाई है।इधर, सिंचाई विभाग के जेई तनुज वर्मा ने कहा कि उस गदेरे में पेयजल योजना पूर्व से संचालित होने की जानकारी अभी-अभी उनके संज्ञान में आई है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को मौके का निरक्षण किया जाएगा। उसके बाद ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।
उस योजना से नहीं टपकी बूंद
जागेश्वर धाम में सिंचाई विभाग की योजनाएं सरकारी धन का दुरुपयोग साबित हुई हैं। कुछ साल पहले जागेश्वर धाम में ब्रह्मकुंड के ठीक नीचे से एक सिंचाई योजना कोटेश्वर गांव तक के लिए बनाई गई थी। करीब एक किमी तक मोटे-मोटे पाइप बिछाए गए थे। साथ ही कोटेश्वर गांव में विशालकाय टैंक भी बनाए गए थे। वह योजना करीब 80 लाख में बनाई गई थी। लेकिन उस योजना से कोटेश्वर गांव में कभी भी एक बूंद सिंचाई के लिए पानी नहीं आया। अब उस योजना के पाइप गायब होने लगे है। अब ठीक उसी तर्ज पर एक ओर योजना बनाकर सरकारी धन बर्बाद करने की तैयारी चल रही है।
